ऊर्जा और पर्यावरण की चर्चा में लकड़ी आधारित बायोमास का उल्लेख होते ही ध्यान प्रायः बिजली उत्पादन पर चला जाता है। लेकिन जापान के आधिकारिक आंकड़े एक अलग और उपयोगी दृष्टिकोण सामने रखते हैं: लकड़ी केवल ग्रिड के लिए बिजली बनाने वाला ईंधन नहीं है, बल्कि कारखानों और अन्य प्रतिष्ठानों में ऊष्मा उपलब्ध कराने वाला स्थानीय ऊर्जा स्रोत भी है।
यह अंतर भारत के हिंदीभाषी पाठकों सहित उन सभी समाजों के लिए महत्वपूर्ण है जहां उद्योगों, संस्थानों या सामुदायिक सुविधाओं में गर्म पानी, भाप, सुखाने अथवा ताप की जरूरत होती है। बायोमास की भूमिका समझते समय केवल विद्युत उत्पादन क्षमता देखना पर्याप्त नहीं है; यह भी देखना चाहिए कि ईंधन वास्तव में किस प्रकार के उपकरण और किस उपयोग से जुड़ा है।
आंकड़े क्या दिखाते हैं
जापान में लकड़ी आधारित बायोमास ऊर्जा का उपयोग करने वाले कुल 1327 प्रतिष्ठान 2024 में दर्ज किए गए। इनमें केवल बॉयलर रखने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 2024 में 1044 थी। इसी कुल समूह के भीतर विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठान 2024 में 453 थे।
| संकेतक | दर्ज संख्या और समय | इससे मिलने वाला संकेत |
| लकड़ी आधारित बायोमास ऊर्जा उपयोग करने वाले सभी प्रतिष्ठान | 2024 में 1327 प्रतिष्ठान | उपयोग का आधार अनेक प्रतिष्ठानों में फैला हुआ है |
| केवल बॉयलर रखने वाले प्रतिष्ठान | 2024 में 1044 प्रतिष्ठान | प्रत्यक्ष ऊष्मा उपयोग व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा है |
| विनिर्माण क्षेत्र के प्रतिष्ठान | 2024 में 453 प्रतिष्ठान | औद्योगिक गतिविधियों में भी लकड़ी आधारित ऊर्जा की उपस्थिति है |
इन संख्याओं से सबसे स्पष्ट बात यह सामने आती है कि प्रतिष्ठानों की गिनती में बॉयलर-केंद्रित उपयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बॉयलर ईंधन की ऊर्जा को उपयोगी ऊष्मा, गर्म पानी या भाप में बदलने का माध्यम है। इसलिए लकड़ी आधारित बायोमास का मूल्यांकन केवल इस प्रश्न से नहीं होना चाहिए कि उससे कितनी बिजली बनी। उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि उसने किस जगह प्रत्यक्ष तापीय जरूरत पूरी की।
औद्योगिक ऊष्मा पर ध्यान क्यों जरूरी है
बिजली अनेक प्रकार के कामों में इस्तेमाल हो सकती है, लेकिन हर ऊर्जा जरूरत मूलतः विद्युत जरूरत नहीं होती। यदि किसी प्रतिष्ठान को उत्पादन प्रक्रिया के लिए ऊष्मा चाहिए, तो वहां ऊर्जा रूपांतरण की पूरी श्रृंखला को देखना पड़ता है। लकड़ी को पहले बिजली में बदलकर फिर उस बिजली से ऊष्मा तैयार करना और लकड़ी से सीधे बॉयलर चलाना दो अलग व्यवस्थाएं हैं।
जापान के 2024 के आंकड़े यह नहीं बताते कि हर प्रतिष्ठान ने कितनी लकड़ी जलाई, कितनी ऊष्मा प्राप्त की या उसका पर्यावरणीय प्रभाव कितना था। फिर भी वे यह पहचानने में मदद करते हैं कि वास्तविक उपयोग का बड़ा हिस्सा उपकरण स्तर पर बॉयलर से जुड़ा है। इसका अर्थ है कि ऊर्जा संक्रमण पर चर्चा में तापीय मांग को स्वतंत्र विषय की तरह देखना चाहिए।
यही बात इस ओर संकेत करती है कि बायोमास केवल घरेलू ईंधन या बड़े बिजली संयंत्र की कहानी नहीं है। उसका संबंध उन कार्यस्थलों से भी है जहां उत्पादन प्रक्रिया के दौरान ताप की आवश्यकता होती है। अलग-अलग देशों में उद्योगों की संरचना भिन्न हो सकती है, लेकिन “किस प्रक्रिया को किस तापमान और किस रूप में ऊर्जा चाहिए” वाला प्रश्न व्यापक रूप से लागू होता है।
प्रतिष्ठानों की संख्या को क्षमता न समझें
इन आंकड़ों की व्याख्या करते समय सावधानी आवश्यक है। 2024 में दर्ज 1327 प्रतिष्ठानों की संख्या ऊर्जा उत्पादन क्षमता नहीं है। छोटा बॉयलर रखने वाला प्रतिष्ठान और बड़े पैमाने पर ईंधन इस्तेमाल करने वाला प्रतिष्ठान, दोनों इस गणना में एक-एक प्रतिष्ठान के रूप में दिखाई दे सकते हैं। इसलिए प्रतिष्ठानों की संख्या से कुल ईंधन खपत, कुल ऊष्मा उत्पादन या पर्यावरणीय लाभ का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इसी तरह 2024 में केवल बॉयलर रखने वाले 1044 प्रतिष्ठानों का आंकड़ा यह प्रमाणित नहीं करता कि हर बॉयलर समान दक्षता से चला या हर स्थान पर ईंधन का स्रोत समान था। आंकड़ा उपकरण और उपयोग-प्रकार की संरचना दिखाता है; प्रदर्शन का अंतिम मूल्यांकन करने के लिए ईंधन मात्रा, उपयोगी ऊर्जा, संचालन और आपूर्ति से संबंधित अलग जानकारी चाहिए।
विनिर्माण क्षेत्र के 2024 के 453 प्रतिष्ठानों को भी कुल प्रतिष्ठानों के अतिरिक्त मानकर जोड़ना गलत होगा। वे 2024 में दर्ज 1327 प्रतिष्ठानों के भीतर आने वाला एक क्षेत्रीय वर्ग हैं। दूसरी ओर, “केवल बॉयलर” उपकरण के आधार पर बना वर्ग है, जबकि “विनिर्माण” आर्थिक गतिविधि के आधार पर बना वर्ग है। दोनों श्रेणियां अलग प्रश्नों का उत्तर देती हैं और उनमें परस्पर शामिल प्रतिष्ठान हो सकते हैं।
दूसरे देशों के पाठकों के लिए उपयोगी कसौटी
लकड़ी आधारित बायोमास का आकलन करते समय सबसे उपयोगी शुरुआत स्थानीय संसाधन की उपलब्धता से नहीं, बल्कि ऊर्जा मांग के स्वरूप से हो सकती है। पहले यह समझना चाहिए कि किसी कारखाने या सुविधा को बिजली चाहिए, प्रत्यक्ष ऊष्मा चाहिए, या दोनों। उसके बाद उपकरण, ईंधन आपूर्ति और उपयोग के वास्तविक पैमाने को अलग-अलग देखा जा सकता है।
जापान का 2024 का अनुभव यह सिखाता है कि बायोमास नीति और ऊर्जा आंकड़ों में बॉयलर तथा औद्योगिक ऊष्मा को दृश्य बनाना जरूरी है। यदि रिपोर्टिंग केवल विद्युत क्षमता पर केंद्रित हो, तो ऊर्जा उपयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सार्वजनिक चर्चा से बाहर रह सकता है।
अंततः इन आंकड़ों का मुख्य संदेश किसी देश के लिए तैयार समाधान प्रस्तुत करना नहीं है। वे एक मापन संबंधी सबक देते हैं: लकड़ी आधारित ऊर्जा को समझने के लिए प्रतिष्ठानों की संख्या, उपकरण का प्रकार और आर्थिक क्षेत्र अलग-अलग दर्ज किए जाने चाहिए। तभी यह स्पष्ट होगा कि बायोमास कहां बिजली का स्रोत है और कहां वह रोजमर्रा की औद्योगिक ऊष्मा व्यवस्था का हिस्सा है।
出典
- 木質バイオマスエネルギー利用動向調査(林野庁)、2024年・全国の事業所数およびボイラー所有形態:https://www.e-stat.go.jp/dbview?sid=0004045593
- 木質バイオマスエネルギー利用動向調査(林野庁)、2024年・製造業の事業所数:https://www.e-stat.go.jp/dbview?sid=0004045568